Sunday, 20 August 2023

जामुन

 



जामुन एक ऐसा वृक्ष जिसके अंग अंग में औषधि है


अगर जामुन की मोटी लकड़ी का टुकडा पानी की टंकी में रख दे तो टंकी में शैवाल, हरी काई नहीं जमेगी और पानी सड़ेगा भी नहीं। 


जामुन की इस खुबी के कारण इसका इस्तेमाल नाव बनाने में बड़ा पैमाने पर होता है।


पहले के जमाने में गांवो में जब कुंए की खुदाई होती तो उसके तलहटी में जामून की लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता है जिसे जमोट कहते है। 


दिल्ली की निजामुद्दीन बावड़ी का हाल ही में हुए जीर्णोद्धार से ज्ञात हुआ 700 सालों के बाद भी गाद या अन्य अवरोधों की वजह से यहाँ जल के स्तोत्र बंद नहीं हुए हैं। 


भारतीय पुरातत्व विभाग के प्रमुख के.एन. श्रीवास्तव के अनुसार इस बावड़ी की अनोखी बात यह है कि आज भी यहाँ लकड़ी की वो तख्ती साबुत है जिसके ऊपर यह बावड़ी बनी थी। श्रीवास्तव जी के अनुसार उत्तर भारत के अधिकतर कुँओं व बावड़ियों की तली में जामुन की लकड़ी का इस्तेमाल आधार के रूप में किया जाता था।


स्वास्थ्य की दृष्टि से विटामिन सी और आयरन से भरपूर जामुन शरीर में न केवल हीमोग्लोबिन की मात्रा को बढ़ाता। पेट दर्द, डायबिटीज, गठिया, पेचिस, पाचन संबंधी कई अन्य समस्याओं को ठीक करने में अत्यंत उपयोगी है।


एक रिसर्च के मुताबिक, जामुन के पत्तियों में एंटी डायबिटिक गुण पाए जाते हैं, जो रक्त शुगर को नियंत्रित करने करती है। ऐसे में जामुन की पत्तियों से तैयार चाय का सेवन करने से डायबिटीज के मरीजों को काफी लाभ मिलेगा।


सबसे पहले आप एक कप पानी लें। अब इस पानी को तपेली में डालकर अच्छे से उबाल लें। इसके बाद इसमें जामुन की कुछ पत्तियों को धो कर डाल दें। अगर आपके पास जामुन की पत्तियों का पाउडर है, तो आप इस पाउडर को 1 चम्मच पानी में डालकर उबाल सकते हैं। जब पानी अच्छे से उबल जाए, तो इसे कप में छान लें। अब इसमें आप शहद या फिर नींबू के रस की कुछ बूंदे मिक्स करके पी सकते हैं। 


जामुन की पत्तियों में एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं. इसका सेवन मसूड़ों से निकलने वाले खून को रोकने में और संक्रमण को फैलने से रोकता है। जामुन की पत्तियों को सुखाकर टूथ पाउडर के रूप में प्रयोग कर सकते हैं. इसमें एस्ट्रिंजेंट गुण होते हैं जो मुंह के छालों को ठीक करने में मदद करते हैं। मुंह के छालों में जामुन की छाल के काढ़ा का इस्तेमाल करने से फायदा मिलता है। जामुन में मौजूद आयरन खून को शुद्ध करने में मदद करता है।


जामुन की लकड़ी न केवल एक अच्छी दातुन है अपितु पानी चखने वाले (जलसूंघा) भी पानी सूंघने के लिए जामुन की लकड़ी का इस्तेमाल करते। 


DESHI GHEE USES








रोगानुसार गाय के घी के उपयोग :


                   

१. गाय का घी नाक में डालने से पागलपन दूर होता है ।

२. गाय का घी नाक में डालने से एलर्जी खत्म हो जाती है ।

३. गाय का घी नाक में डालने से लकवा का रोग में भी उपचार होता है ।

४. 20-25 ग्राम गाय का घी व मिश्री खिलाने से शराब, भांग व गांजे का नशा कम हो जाता है ।

५. गाय का घी नाक में डालने से कान का पर्दा बिना ओपरेशन के ही ठीक हो जाता है ।

६. नाक में घी डालने से नाक की खुश्की दूर होती है और दिमाग तरोताजा हो जाता है ।

७. गाय का घी नाक में डालने से कोमा से बाहर निकल कर चेतना वापस लोट आती है

८. गाय का घी नाक में डालने से बाल झडना समाप्त होकर नए बाल भी आने लगते है ।

९. गाय के घी को नाक में डालने से मानसिक शांति मिलती है, याददाश्त तेज होती है ।

१०. हाथ-पॉँव मे जलन होने पर गाय के घी को तलवो में मालिश करें जलन ठीक होता है ।

११. हिचकी के न रुकने पर खाली गाय का आधा चम्मच घी खाए, हिचकी स्वयं रुक जाएगी ।

१२. गाय के घी का नियमित सेवन करने से एसिडिटी व कब्ज की शिकायत कम हो जाती है ।

१३. गाय के घी से बल और वीर्य बढ़ता है और शारीरिक व मानसिक ताकत में भी इजाफा होता है ।

१४. गाय के पुराने घी से बच्चों को छाती और पीठ पर मालिश करने से कफ की शिकायत दूर हो जाती है ।

१५. अगर अधिक कमजोरी लगे, तो एक गिलास दूध में एक चम्मच गाय का घी और मिश्री डालकर पी लें ।

१६. हथेली और पांव के तलवो में जलन होने पर गाय के घी की मालिश करने से जलन में आराम आयेगा ।

१७. गाय का घी न सिर्फ कैंसर को पैदा होने से रोकता है और इस बीमारी के फैलने को भी आश्चर्यजनक ढंग से रोकता है ।

१८. जिस व्यक्ति को हार्ट अटैक की तकलीफ है और चिकनाई खाने की मनाही है तो गाय का घी खाएं, इससे ह्रदय मज़बूत होता है ।

१९. देसी गाय के घी में कैंसर से लड़ने की अचूक क्षमता होती है। इसके सेवन से स्तन तथा आंत के खतरनाक कैंसर से बचा जा सकता है ।

२०. गाय का घी, छिलका सहित पिसा हुआ काला चना और पिसी शक्कर या बूरा या देसी खाण्ड, तीनों को समान मात्रा में मिलाकर लड्डू बाँध लें । प्रतिदिन प्रातः खाली पेट एक लड्डू खूब चबा-चबाकर खाते हुए एक गिलास मीठा गुनगुना दूध घूँट-घूँट करके पीने से स्त्रियों के प्रदर रोग में आराम होता है, पुरुषों का शरीर मोटा ताजा यानी सुडौल और बलवान बनता है ।

२१. फफोलों पर गाय का देसी घी लगाने से आराम मिलता है ।

२२. गाय के घी की छाती पर मालिश करने से बच्चो के बलगम को बहार निकालने मे सहायता मिलती है ।

२३. सांप के काटने पर 100 -150 ग्राम गाय का घी पिलायें, उपर से जितना गुनगुना पानी पिला सके पिलायें, जिससे उलटी और दस्त तो लगेंगे ही लेकिन सांप का विष भी कम हो जायेगा ।

२४. दो बूंद देसी गाय का घी नाक में सुबह शाम डालने से माइग्रेन दर्द ठीक होता है ।

२५. सिर दर्द होने पर शरीर में गर्मी लगती हो, तो गाय के घी की पैरों के तलवे पर मालिश करे, इससे सिरदर्द दर्द ठीक हो जायेगा ।

२६. यह स्मरण रहे कि गाय के घी के सेवन से कॉलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ता है । वजन भी नही बढ़ता, बल्कि यह वजन को संतुलित करता है । यानी के कमजोर व्यक्ति का वजन बढ़ता है तथा मोटे व्यक्ति का मोटापा (वजन) कम होता है ।

२७. एक चम्मच गाय के शुद्ध घी में एक चम्मच बूरा और 1/4 चम्मच पिसी काली मिर्च इन तीनों को मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोते समय चाट कर ऊपर से गर्म मीठा दूध पीने से आँखों की ज्योति बढ़ती है ।

२८. गाय के घी को ठन्डे जल में फेंट ले और फिर घी को पानी से अलग कर ले यह प्रक्रिया लगभग सौ बार करे और इसमें थोड़ा सा कपूर डालकर मिला दें । इस विधि द्वारा प्राप्त घी एक असर कारक औषधि में परिवर्तित हो जाता है जिसे जिसे त्वचा सम्बन्धी हर चर्म रोगों में चमत्कारिक कि तरह से इस्तेमाल कर सकते हैं । यह सौराइशिस के लिए भी कारगर है ।

२९. गाय का घी एक अच्छा (LDL) कोलेस्ट्रॉल है। उच्च कोलेस्ट्रॉल के रोगियों को गाय का घी ही खाना चाहिए । यह एक बहुत अच्छा टॉनिक भी है ।

३०. अगर आप गाय के घी की कुछ बूँदें दिन में तीन बार, नाक में प्रयोग करेंगे तो यह त्रिदोष (वात पित्त और कफ) को सन्तुलित करता है ।



भूमि आंवला

 



भूमि आंवला के औषधिय  गुण व उपयोग विधि -


 1- सूजन, पीलिया और  कमजोर लिवर की समस्याओं को दूर करने में मदद करता है। इसके अलावा  ये लिवर के काम-काज को भी तेज करता है और डिटॉक्सीफिकेशन के प्रोसेस को तेज करता है।  जिन लोगों को मतली या खाना न पचा पाने की परेशानी है या खाने के बाद दस्त आने की परेशानी होती है, उनके लिए भी ये बहुत फायदेमंद है।


2. पेशाब से जुड़ी परेशानियों को कम करता है

पेशाब से जुड़ी परेशानियों को दूर भगाने में भूमि आंवला बहुत फायदेमंद है। असल में ये डाइयूरेटिक (diuretic) गुणों से भरपूर है, जो कि पेशाब की परेशानी को दूर करते हैं और यूटीआई इंफेक्शन को भी दूर करते हैं। इसके अलावा ये शरीर से पानी और सोडियम को बाहर निकालने में भी मदद करते हैं। ये हाई ब्लड प्रेशर को भी कम करने में मदद करते हैं। 


3. डायबिटीज को कंट्रोल करने में मददगार 

पुराने जमाने में डायबिटीज में मरीज भुई आंवला को चबाया करते थे और उनका मानना था कि ये ब्लड शुगर को संतुलित करने में भी मददगार है। वहीं कुछ शोध बताते हैं कि इसका अर्क या रस ब्लड शुगर को कम करने और इसमें अचानक होने वाली बढ़ोतरी को कम करते हैं। साथ ही ये डायबिटीज के मरीज में मेटाबोलिज्म को सही करके वजन संतुलित रखने में मदद करते हैं।


4. खांसी और जुकाम

भूमि आंवला में कफ को संतुलित करने का गुण होता है इसलिए ये खांसी, अस्थमा, सांस फूलना और सांस से जुड़ी परेशानियों को कम करता है। इसका आप काढ़ा बना कर या कई प्रकार से इस्तेमाल कर सकते हैं। दरअसल इसके एंटी वायरल गुण मौसी इंफेक्शन और बीमारियों से बचाने का काम करते हैं। इसमें कुछ एंटी ऑक्सीडेंट गुण भी जाते हैं, जो कि आपकी इम्यूनिटी बूस्ट करके आपको मौसम बदलने के साथ होने वाले फ्लू और सर्दी जुकाम से बचाते हैं।


5. टायफाइड के बुखार को कम करता है

भूमि आंवला अपने कड़वे रस के कारण और पित्त संतुलन में मदद करता है। ये टायफाइड के बुखार को भी कम करता है और दवाओं के साथ इसके प्रभाव को बढ़ाता है। ये चयापचय को भी ठीक करने में मदद करता है और शरीर से गंदगी को डिटॉक्स करने में मदद करता है। बुखार को दूर करने के लिए इसके मासूम पत्ते को काली मिर्च मिला कर पी लें। पीसने के बाद छोटी -छोटी गोलियां बना कर इसका सेवन करें। इसके अलावा आप बुखार में  घी, पिप्पली के साथ भूमि आंवला मिला कर लेने से सकते हैं, जो कि बुखार को कम करने में मदद करेगा। 


6. अपच और एसिडिटी में कारगर

अपच और एसिडिटी होने पर भूमि आंवला के पत्तों को चबाने से इससे राहत मिलती है। दरअसल ये पित्त संतुलन को सही करता है और पेट की गर्मी को शांत करता है।  इसके अलावा इसका रेगुलर सेवन करने से ये पाचनतंत्र को सही करता है और अपच और एसिडिटी की परेशानियों को कम करने में मदद करता है। साथ ही पेट में एसिड के रिलीज को भी कम करता है। इसके अलावा अगर आपका पेट खराब है ये आपको दस्त की परेशानी हो रही है, तो भूमि आंवला को पानी में पकाएं। जब पानी एक चौथाई रह जाए तो मेथी का चूर्ण 5 ग्राम मिलाएं। इसे उबालते रहें और इसे छानकर पिएं। इसे थोड़ा-थोड़ा पीने से दस्त पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है। 


7. गठिया के दर्द से आराम दिलाता है

अगर आपके शरीर में वात ज्यादा है या आपको गठिया की समस्या है तो भूमी आंवला का सेवन इस परेशानी को कम करने में मदद कर सकता है। इसके लिए भूमी आंवला को पीस कर इसमें काला नमक मिलाकर दर्द वाली जगह पर लगाएं। इससे गठिया के दर्द से आराम मिलेगा।


भूमि आंवला को कैसे करे उपयोग 


1. भूमि आंवला जूस बनाएं

भूमी आंवला जूस बनाने के लिए 1 गिलास पानी के साथ इसके पत्तों को मिला कर पिस  लें। फिर इसनें नींबू और नमक मिला कर इसका सेवन करें। इसे दिन में एक बार नाश्ते से पहले लें।


2. भूमि आंवला चूर्ण

भूमि आंवला चूर्ण बनाने के लिए इसके पत्तों, फूल और छोलों को सूखा लें। अब इसे पीस लें और इसका  चूर्ण बना लें। इसे लंच और डिनर के बाद दिन में दो बार लें। इसके अलावा अगर आपको कब्ज हो रहा हो तो, इसका एक चम्मच चूर्ण लें और गर्म पानी पिएं। इससे आपका पेट साफ रहेगा।


3. भूमि आंवला चाय

दोपहर और रात के खाने के बाद पानी के बाद अच्छा पाचन के लिए आप भूमि आंवला चाय ले सकते हैं। इसके लिए आपको ज्यादा कुछ नहीं करना है बस आपको इसे काली चाय की तरह बनाना है। इसके लिए आपको इसके पत्तो को चाय के लिए उबलते पानी में डाल लें और बाकी चीजों को डाल कर नॉर्मल चाय बनाएं। फिर इसमें हल्का सा काला नमक और नींबू का रस मिलाएं और सर्व करें। भूमि  आंवला पाउडर लिवर की सुरक्षा और एंटीवायरल गुणों के कारण लिवर के लिए अच्छा है पर साथ ही यह बालों के रोम को नुकसान से बचाने , बाल झड़ने से रोकने और नए बालों को उगने में मदद करता है। बालों को झड़ने से रोकने के लिए आप हल्के भोजन लेने के बाद दिन में दो बार 1 कप गुनगुने पानी के साथ भूमि आंवला पाउडर लें। ये आपके बालों को लंबा और मजबूत बनाने में मदद करेगा।


भूमि आंवला को आप अपने गमले में लगा सकते हैं या साफ पानी वाली जगहों पर पा सकते हैं। इसका पौधा सीधा और भूमि पर फैलने वाला होता है। इसकी पत्ती छोटे और चपटे होते हैं जो कि आंवला या इमली के पत्ती के छोटे होते हैं। पर आंवले के पत्तों की तुलना में ये छोटे एवं चमकीले होते हैं। इस पर छोटे-छोटे फूल भी होते हैं और इसके पूरे पौधे  का इस्तेमाल किया जा सकता है।


Friday, 18 August 2023

Aelovera

 



एलोवेरा या एलो बार्बडेंसिस एक छोटे तने वाला पौधा है जो अपनी पत्तियों में पानी जमा करता है। इसे हिंदी में 'घृतकुमारी' भी कहा जाता है। पत्तियां दाँतेदार किनारों के साथ हरे रंग की होती हैं।


एलोवेरा हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा होता है। पत्तियों में मौजूद जेल का जूस बनाकर सेवन किया जा सकता है।


एलोवेरा में विटामिन सी, विटामिन ई, विटामिन बी9 और विटामिन बी12 मौजूद होता है। इसमें कैल्शियम, तांबा, सोडियम, मैग्नीशियम, पोटेशियम, सेलेनियम, मैंगनीज, जस्ता आदि जैसे खनिज भी होते हैं।


एलोवेरा के फायदे और उपयोग -

एलोवेरा का उपयोग क्या है? एलोवेरा का उपयोग पारंपरिक रूप से त्वचा की चोटों (जलने, कटने, कीड़े के काटने और एक्जिमा) और पाचन समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है क्योंकि इसमें सूजनरोधी, रोगाणुरोधी और घाव भरने वाले गुण होते हैं।


  • एलोवेर का जूस 5-10 ml प्रतिदिन उपयोग कर सकते हैं | 

  • स्वाद और अच्छा प्रभाव के लिए निम्बू और काला नमक का आवश्यकता अनुसार उपयोग करें |  

  • 1-2 महीने तक रखने के लिए जेल को दुगना पानी में धीमी आंच से उबालें | पानी जैसे होजाने पर पुदीना पत्ता डालें और ठंडा होने दें | फिर निम्बू निचोड़ कर फ्रीज़ में रख कर उपयोग करें | 

  • त्वचा की रोग में उपयोग के लिए हल्दी के साथ प्रयोग करें|

  • कफ के रोग के लिए पिपली चूर्ण के साथ उपयोग करें |

  • विटामिन E कैप्सूल डाल कर रख सकते हैं।5-7 दिन उपयोग कर सकते हैं  

  •   नारियल, तिल, सरसों के तेल में शिर में उपयोग हेतु  तैल बना सकते हैं| 


  • गैस्ट्रो-ओसोफेगल रिफ्लक्स रोग (जीईआरडी) का उपचार:

गैस्ट्रो-एसोफेजियल रिफ्लक्स रोग के मरीजों को सीने में जलन, पेट फूलना, भोजन का उलट जाना, मतली, उल्टी, एसिड का उलटना आदि जैसे लक्षणों का अनुभव होता है।


  • एलोवेरा सिरप का सेवन करने पर जीईआरडी के अधिकांश लक्षणों की आवृत्ति में कमी देखी गई है। यह गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल विकारों के लिए एलोवेरा जेल के सबसे प्रभावी उपयोगों में से एक है।


  • हमारे पाचन तंत्र के लिए अच्छा है:

एलोवेरा हमारे पाचन तंत्र के लिए वरदान है। यह हमारे पाचन तंत्र को साफ करने में मदद करता है। यह कब्ज को रोकने, मल त्याग में भी मदद करता है। इस प्रकार एलोवेरा एक प्रभावी रेचक है। 


  • एलोवेरा के सूजनरोधी गुण इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) के इलाज में मदद करते हैं।


  • हमारे शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है:

खाली पेट एलोवेरा जूस पीने से हमारे शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिलती है। यह हमारे पाचन तंत्र को भी साफ करता है। इस प्रकार, एलोवेरा हमारे शरीर को प्राकृतिक रूप से डिटॉक्सीफाई करने में मदद करता है। 


  • मौखिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा:

एलोवेरा माउथवॉश का एक प्रभावी घटक है। यह हमारे मसूड़ों में प्लाक और सूजन को कम करने में मदद करता है।  यह मसूड़ों में रक्तस्राव को कम करने में भी मदद करता है।


  • एलोवेरा की रोगाणुरोधी गतिविधि मौखिक गुहा के संक्रमण को रोकने में भी मदद करती है। 


  • रक्त शर्करा के स्तर को कम करता है:

जब एलोवेरा का सेवन किया जाता है, तो यह रक्त शर्करा के स्तर को प्रभावी ढंग से कम कर देता है।


  • एलोवेरा को टाइप 2 मधुमेह के प्रबंधन में उपयोगी पाया गया है। 

  • हमारी त्वचा के लिए अद्भुत:

त्वचा पर एलोवेरा लगाने से त्वचा को हाइड्रेटेड रखने में मदद मिलती है, लोच में सुधार होता है और झुर्रियों के विकास को रोका जा सकता है। एलोवेरा त्वचा को चमकदार और मुलायम रखता है। यह मुंहासों को भी रोकता है।


  • सनबर्न पर एलोवेरा लगाने से तेजी से ठीक होने में मदद मिलती है।[9]


  • अनुसंधान ने स्थापित किया है कि एलोवेरा जेल पहली और दूसरी डिग्री के जलने के खिलाफ अत्यधिक प्रभावी है। एलोवेरा में मौजूद यौगिक एलोइन को सूजनरोधी क्रिया का कारण बताया गया। इसके अलावा, एलोवेरा त्वचा को नमी देने और धूप की कालिमा के परिणामस्वरूप होने वाली पपड़ी को रोकने में मदद करता है।


  • सनबर्न के लिए एलोवेरा का उपयोग करने के लिए आप या तो अपने बगीचे के पौधे की पत्ती से जेल निकाल सकते हैं या फार्मेसी से एलोवेरा जेल खरीद सकते हैं। सनबर्न की झुनझुनी से राहत पाने के लिए, आप एलोवेरा जेल को कुछ घंटों के लिए फ्रिज में रख सकते हैं और फिर इसे पूरे दिन प्रभावित क्षेत्र पर कई बार लगा सकते हैं।


  • सोरायसिस का उपचार:

एलोवेरा जेल त्वचा में नमी बनाए रखता है। यह सोरायसिस के रोगियों में लालिमा और पपड़ी को कम करने में भी मदद करता है।  


  • हमारे बालों के लिए अच्छा:

एलोवेरा हमारे बालों के लिए अद्भुत है। एलोवेरा जेल हमारे बालों को मजबूत और चमकदार बनाता है। यह रक्त परिसंचरण को बढ़ाता है, जिससे बालों के विकास में सुधार होता है। यह रूसी से छुटकारा पाने में भी मदद करता है।  कई शैंपू और कंडीशनर में एलोवेरा की मात्रा होती है।


  • शीर्ष पर लगाने पर एलो में बहुत शक्तिशाली एंटी-एजिंग प्रभाव होते हैं। एलो फ़ाइब्रोब्लास्ट को उत्तेजित करता है जो कोलेजन और इलास्टिन फाइबर का उत्पादन करता है जिससे त्वचा अधिक लोचदार और कम झुर्रीदार हो जाती है। यह सतही परतदार एपिडर्मल कोशिकाओं को आपस में चिपकाकर उन पर संसक्त प्रभाव डालता है, जिससे त्वचा मुलायम हो जाती है। अमीनो एसिड कठोर त्वचा कोशिकाओं को भी नरम करता है और जिंक छिद्रों को कसने के लिए एक कसैले के रूप में कार्य करता है|



  •  रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है:

एलोवेरा एक शक्तिशाली प्रतिरक्षा बूस्टर है। यह एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है और सूजन को कम करता है। यह बैक्टीरिया, वायरस और कवक को मारता है, इस प्रकार हमें विभिन्न प्रकार के संक्रमणों से बचाता है।


  • घाव भरने को बढ़ावा देता है:

एलोवेरा घाव भरने में प्रभावी गुण दिखाता है। यह प्रभावित क्षेत्र में रक्त संचार को बढ़ाता है। इसका व्यापक रूप से जलने, कटने, कीड़े के काटने और एक्जिमा के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है।


  • वजन घटाने में मदद करता है:

एलोवेरा जूस पीने से वजन कम करने में मदद मिलती है। यह हमारे शरीर से विषाक्त पदार्थों को साफ करता है और हमारे पाचन तंत्र को साफ करता है। यह हमें भरा हुआ भी रखता है, जिससे अत्यधिक कैलोरी का सेवन नहीं होता है।एलोवेरा हमारे चयापचय को भी बढ़ावा देता है, जिससे वसा जलती है और वजन घटाने को बढ़ावा मिलता है।


  • शेल्फ जीवन बढ़ाता है:

एलोवेरा फलों और सब्जियों की शेल्फ लाइफ को बढ़ाता है। कुछ फलों और सब्जियों पर एलोवेरा जेल का लेप लगाने से उनकी शेल्फ लाइफ बढ़ जाती है। इसने फंगस और बैक्टीरिया के विकास को रोका, इस प्रकार उन्हें खराब होने से बचाया।


  • गुदा विदर से राहत:

एलोवेरा जेल के कुछ अन्य बहुत प्रभावी उपयोगों में गुदा दरारों से राहत प्रदान करना शामिल है। गुदा विदर गुदा या गुदा नहर की परत के चारों ओर फट रहा है। गुदा वह बिंदु है जहां से शरीर से मल बाहर निकाला जाता है। गुदा विदर एक दर्दनाक स्थिति हो सकती है और यदि इसे सही समय पर संबोधित नहीं किया जाता है, तो इसके लिए सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है। महंगी ऑपरेटिव देखभाल का सहारा लिए बिना गुदा विदर से राहत पाने के लिए, आप घरेलू उपचार के रूप में एलोवेरा जेल का उपयोग करने का प्रयास कर सकते हैं। आप तने से एलोवेरा जेल निकालें और इसे पूरे दिन में दो बार सीधे प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि सक्रिय घटक के रूप में एलोवेरा युक्त औषधीय क्रीम का उपयोग गुदा विदर को ठीक करने के खिलाफ तेजी से प्रतिक्रिया करता हुआ पाया गया।


  •   एलो वेरा जेल का उपयोग सावधानी के साथ किया जाना चाहिए क्योंकि यह त्वचा में जलन, पित्ती, ऐंठन और अन्य गंभीर स्थितियों का कारण हो सकता है जिसके लिए चिकित्सा हस्तक्षेप की आवश्यकता हो सकती है।


क्या एलोवेरा का उपयोग सुरक्षित है?

  • यह पाया गया है कि एलोवेरा जेल विभिन्न प्रकार की त्वचा वाले लोगों द्वारा अच्छी तरह से सहन किया जा सकता है। हालाँकि, त्वचा की मामूली जलन और एलर्जी प्रतिक्रियाएँ बहुत असामान्य नहीं हैं। यदि आप एलोवेरा के प्रति अतिसंवेदनशील हैं, तो यह सलाह दी जाती है कि आप इसका उपयोग बंद कर दें।

  • विशेषज्ञ एलोवेरा जेल को किसी भी गंभीर जलन या कट पर सीधे नहीं लगाने की सलाह देते हैं,  

  • यदि आपको पहले से ही ट्यूलिप और प्याज और लहसुन जैसी रसोई सामग्री से एलर्जी है, तो एलोवेरा जेल का उपयोग करने से बचें।

  • किसी भी निर्धारित ऑपरेशन के दो सप्ताह की अवधि के भीतर एलोवेरा का उपयोग न करें।

  • 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं को मौखिक रूप से एलोवेरा का सेवन नहीं करना चाहिए।

  • एलोवेरा जेल का सेवन करते समय हर 2-3 महीने के निरंतर सेवन के बाद एक सप्ताह का अंतर दें। हमेशा प्रतिष्ठित ब्रांड से ही खरीदारी करें।

  • एलोवेरा अन्य मौखिक दवाओं की अवशोषण क्षमता को कम कर सकता है। यदि आप दवाएँ ले रहे हैं तो अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

  • एलोवेरा में रेचक गुण होते हैं जो पेट में ऐंठन और दस्त का कारण बन सकते हैं, मौखिक रूप से एलोवेरा का सेवन करते समय सावधानी बरतें।

यदि आप नीचे सूचीबद्ध स्थितियों से पीड़ित हैं तो एलोवेरा का सेवन न करें:

  • गुर्दे संबंधी विकार

  • अर्श

  • हृदय संबंधी स्थितियाँ

  • नासूर के साथ बड़ी आंत में सूजन

  • मधुमेह

  • अंतड़ियों में रुकावट

  • क्रोहन रोग


एलोवेरा से उत्पन्न होने वाले कुछ दुष्प्रभाव इस प्रकार हैं:

  •  पोटैशियम की कमी 

  • दस्त

  • मांसपेशियों में कमजोरी

  • इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन

  • पेट दर्द

  • गुर्दे से संबंधित समस्याएं

Thursday, 3 August 2023

cow urine

 


गौमूत्र निम्न बीमारियों पर काम करता है - 


 1 :-हृदय रोगो से निजात । 
2 :- ब्लड प्रेशर कम / ज्यादा को सामान्य करता है ।
3 :- हार्ट ब्लोकेज से बचाता है एवं सही करता है ।
4 :- हृदय को मजबूत एवं ताऐकत प्रदान करता है ।
5 :- हृदयाघात या पक्षघात या हार्ट अटैक से बचाता है ।

6 :- लीवर ( यकृत ) के रोगो से निजात दिलाता है । 
7 :- फैटी लीवर से निजात ।
8 :- पीलिया ।
9 :- लीवर कैंसर ।
10 :- लीवर में सूजन ।
11 :- लीवर की जन्म जात या अनुवांशिक बीमारी ।
12 :- सिरोसिस या लीवर पे घाव ।
13 :- हेपेटाइटिस। 
14 :- कोरानरी धमनियों की बीमारी से लाभ ।

 15 :- फेफडों के रोगों से निजात । 
16 :- अस्थमा ।
17 :- फेफड़ो का कैंसर ।
18 :- निमोनिया ।
19 :- टी०बी० की समस्याओं से लाभ।
20 :- स्वास ( दमा ) ।
21 :- घवराहट ।
22 :- सांस फूलना ।
23 :- खांसी ।
24 :- अधिक बलगम ।
25 :- छाती या सीने में दर्द ।

 26 :- गुर्दा या किडनी के रोगों से निजात । 
27 :- गुर्दे की पथरी ।
28 :- किडनी कैंसर ।
29 :- किडनी में सूजन ।
30 :- एनीमिया ।

 31 :- गुप्त रोगो से निजात । 
32 :- कामेच्छाओं में कमी ।
33 :- प्रजनन क्षमता में कमी ।
34 :- बाँझपन ।
35 :- शुक्राणुओं एवं अन्डाणुओं की कमी या कमजोरी ।
36 :- वीर्य की कमी ।
37 :- नपुसंकता ।
38 :- सेक्सुअली समस्या ।
39 :- स्पर्म काऊंटर प्वाइंट को एवं बढ़ाना ।
40 :- मेन पावर को बढ़ाता है ।

 41 :- मस्तिष्क के रोगो से निजात । 
42 :- चक्कर आना या ( मांसिक कमजोरी ) ।
43 :- नींद न आना, अनिद्रा , तनाव , डिप्रेशन या तनाव ।
44 :- ब्रेन ट्यूमर ।
45 :- माईग्रेन ।
46 :- ब्रेन हैमरेंज ।
47 :- लकवा या पक्षघात या पैरालाईज, ।
48 :- नसों की कमजोरी या हांथ पैर काँपना ।
49 :- हाथ पैर या शरीर में सुन्नपन ।
50 :- सर में दर्द रहना या आधे सिर में दर्द रहना।
51 :- मिर्गी । पागल 
52 :- दौड़ा ।
53 :- साईटिका ( नस का दब जाना ) ।
54 :- शारीरिक थकान या कम्जोरी ।
55 :- नसों में ब्लॉकेज ।
56 :- स्मरणीय शक्ति या एकाग्रता या याददाश्त की कमी ।

 57 :-आँखों की कमी से निजात । 
58 :- आँखों से कम दिखाई देना या नजर की कमजोरी ।
59 :- आँखों के चश्मे से मुक्ति ।
60 :- आँखों से पानी आना ।
61 :- आँखों में जलन, सूजन, या दर्द रहना ।
62 :- आँखों में इंफेक्शन होना ।

 63 :- नाक के रोगो से निजात । 
64 :- नाक से खून आना ।
65 :- नाक का मास बढ़ जाना ।
66 :- नाक में जुकाम बना रहना या नकसीर ।
67 :- सांस लेने में परेशानी होना ।

 68 :- कान के रोगो से निजात । 
69 :- कान से कम सुनाई देना या बहरापन ।
70 :- कान से खून आना या मबाद आना ।
71 :- कान से साय - साय की आवाज़ आना ।

 72 :- मुँह के रोगो से निजात । 
73 :- मुँह में कैंसर ।
74 :- मुँह से बदबू आना ।
75 :- मुँह में छाले बने रहना ।
76 :- मुँह में दाँतो की समस्या ।
77 :- पायरिया ।
78 :- दांतो में कीड़ा लगना ।

 79 :- बालों की समस्या से निजात । 
80 :- बाल झड़ना ।
81 :- बालों का कमजोर होना ।
82 :- नये बाल न आना ।
83 :- हाईड्रोसील ( वृषण का बड़ जाना या पानी भर जाना )।
84 :- स्तन में गांठ या स्तन कैंसर ।

 85 :- त्वचा के रोगो से निजात । 
86 :- सोरायसिस ।
87 :- दाद , खाज , खुजली , लाल - काले चकत्ते होना ।
88 :- सफेद दाग की समस्या ।
89 :- शरीर में दने , फोड़ा - फुंसी, या पानी भरना, मबाद आना, घाव होना या ऐड़ी फटना या त्वचा में किसी भी प्रकार का 
 कोई इंफैकशन झुर्रियाँ कम करना दाग, धब्बे, कील, मुहासे छाजन, झाँईया इत्यादि रोग ।
90 :- बबासीर ।

 91 :- गले से होने वाली समस्याओं से निजात । 
92 :- गले में सूजन ।
93 :- गलगण्ड का रोग ।
94 :- घेंघा ।
95 :- थाईराइड ।
96 :- बलगम की समस्या ।
97 :- गले में इंफैक्शन ।
98 :- गले में कैंसर ।
99 :- मधुमेह ( सुगर ) ।

 100 :- जोड़ो का दर्द ( घुटनों का दर्द , कमर का दर्द )। 
101 :- गठिया वाय ।
102 :- अर्थराइटिस ।

 103 :- पाचन क्रिया का खराब होना । 
104 :- गैस की समस्या, खट्टी डकारें, सीने में जलन, खड्डाई की समस्या ।
105 :- कब्ज की समस्या, बदहजमी ।
106 :- जी मचलाना, भूँख न लगना।
107 :- खून की कमी ( ऐनीमिया ) ।
108 :- शारीरक दुर्बलता ।
109 :- मोटापे की समस्या ।
110 :- नशा से छुटकारा ।
111 :- मौसमी बीमारियों से निजात ।
112 :- एलर्जी ।
113 :- शरीर में कहीं भी गाँठ पढ़ जाना ।
114 :- लिकोरिया ।

 115 :- मासिकधर्म के दौरान होने वाली समस्याओं से निजात । 
116 :- अनिमितता ( अनियमित मासिक चक्र ।
117 :- शारीरिक थकान , कमजोरी महसूस करना ।
118 :- नींद न आना ।
 119 :- चिड़चिड़ापन ।
120 :- कमर दर्द ।

 121 :- बच्चे दानी में गाँठ । 
122 :- बच्चे दानी का फैटी होना या माँस चमा होना ।
123 :- बच्चे दानी में कैंसर ।
124 :- बच्चे दानी का सिकुड़ना या सूजन होना ।
125 :- सफेद पानी की समस्या ।
126 :- कॉलेस्ट्रॉल की समस्या ।
127 :- एड्स ।
128 :- स्वाईन फ्लू ।
129 :- प्रौस्टेट ।
१30 :- अल्जाइमर ।
131 :- यूरिक एसिड का बढना ।
132 :- कोलाईटिस

गौमूत्र सेवन विधि - 

रोगानुसार विस्तृत वर्णन है | परन्तु यहाँ हम साधारण रूप से कैसे ले सकते हैं उसका वर्णन करते हैं| 
  • गाय जब विश्राम के बाद कड़ी होती है उस समय स्टील कांच अथवा मिट्टी का एक बर्तन ले कर खड़ा हो जाएँ | 5- 10 मिनट इन्तजार करें |
  • गाय पेशाब  देने की कोसिस करेगी उस समय बर्तन से ऊपर से ही भरे | जमीं पर गिरने न दे| 
  • उसे लेकर साफ़ धोती जितनी पतली कपड़ा का 7 परत कर दूसरे बर्तन में छान लें | 
  • प्रति व्यक्ति 80- 100 ml उसमे से सेवन के लिए ले ले |


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